हरिद्वार। सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के पालन में कथित लापरवाही को लेकर भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने मोर्चा खोल दिया है। भाकियू पदाधिकारियों ने उप जिलाधिकारी कार्यालय हरिद्वार में एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की। आरटीआई आवेदनों के निस्तारण में देरी का आरोप लगाया गया है। किसान संगठन का कहना है। कि कई मामलों में निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं। बाद में दी जाने वाली सूचनाएं भी कई बार गलत या अधूरी होती हैं। इससे आमजन और किसानों को मजबूर होकर प्रथम अपील का सहारा लेना पड़ता है। भाकियू ने प्रथम अपीलों के दौरान संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के अनुसार अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर अपील की अगली तारीख तय करनी पड़ती है। इससे फरियादियों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होने का आरोप लगाया गया है। संगठन ने इसे जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला बताया। ज्ञापन में सहायक लोक सूचना अधिकारी कार्मिक महेन्द्र कुमार सहित संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई। भाकियू का आरोप है कि सूचना उपलब्ध कराने के संबंध में मौखिक अनुरोध करने के बावजूद सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। संगठन ने कुछ कथित टिप्पणियों का भी हवाला देते हुए प्रशासन से जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि कार्यालय में सैकड़ों प्रार्थना पत्र और किसान संबंधी प्रकरण लंबे समय से लंबित हैं। इसके चलते किसानों मजदूरों और आम लोगों को बार बार कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।आरोप है। कि कई मामलों का समयबद्ध निस्तारण नहीं हो पा रहा है। धारा 41, पैमाइश, भूमि-सीमा और अन्य राजस्व प्रकरणों को लेकर भी शिकायतें दर्ज कराई गईं। भाकियू ने कहा कि निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद भी कई मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। ज्ञापन में आमजन के प्रार्थना पत्रों को टालने और कुछ मामलों में तेजी से कार्रवाई होने का भी आरोप लगाया गया। इसे लेकर संगठन ने पारदर्शिता और समानता के आधार पर जांच की मांग की है। ज्ञापन में भूमि संबंधी एक प्रकरण का भी विशेष उल्लेख किया गया। संजय शर्मा पुत्र स्वर्गीय राजेश्वर प्रसाद, ग्राम मिस्सरपुर की पुश्तैनी कृषि भूमि का मामला उठाया गया। ज्ञापन के अनुसार खाता संख्या 223 और खसरा संख्या 48 की भूमि से जुड़ा प्रकरण नूरपुर पंजनहेड़ी क्षेत्र से संबंधित है। संगठन का आरोप है। कि इस मामले में बार-बार गलत रिपोर्ट तैयार कर भूमि धोखाधड़ी समिति को भेजी गई। भाकियू के अनुसार प्रकरण लंबे समय से समिति के समक्ष लंबित है। संगठन ने आरोपों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों ने कहा कि आरटीआई व्यवस्था का उद्देश्य आमजन को समय पर सूचना उपलब्ध कराना है। ऐसे में देरी और कथित गलत सूचनाओं से व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। किसान संगठन ने लंबित मामलों का विशेष अभियान चलाकर निस्तारण कराने की मांग की। साथ ही प्रथम अपीलों में अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई। भाकियू ने दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में किसानों और आम जनता की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। संगठन ने कहा कि प्रशासन को शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। आरटीआई प्रकरणों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी उठी। इस अवसर पर विजय कुमार शास्त्री जिला अध्यक्ष, आनंद सैनी उपाध्याय, प्रदीप चौधरी, अमित सैनी, सानू जिला सचिव, अनुज, नजाकत, पाई चेची आदि लोग उपस्थित रहे Post navigation हरिद्वार मे बाइक चोरो का बोल बाला जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामले में NHRC पहुंची याचिका।