धर्मनगरी हरिद्वार , जहां एक तरफ सरकार “4 साल बेमिसाल” के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। ताजा मामला हरिद्वार का है, जहां चाइल्ड केयर सेंटर के अधिकारियों ने एक बाल मजदूर को उसके पिता के सुपुर्द किया। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर ये बच्चा मजदूरी कर कैसे रहा था?बता दें कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी यानी NHAI के कार्यों में बाल मजदूरी का मामला सामने आया है। यहां 13 से 16 साल के बच्चों से काम कराया जा रहा था। जिन हाथों में किताब और कॉपी होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में झाड़ू और कचरा उठाने का काम दिया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब पेटी कॉन्ट्रैक्ट के तहत बिना किसी जांच के हो रहा है। छोटे-छोटे बच्चों से मजदूरी करवाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उनके भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसी रास्ते से मंत्री, नेता और प्रशासनिक अधिकारी रोजाना गुजरते हैं। क्या उन्हें ये नजारा दिखाई नहीं देता? या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? फिलहाल चाइल्ड केयर सेंटर ने एक बच्चे को उसके पिता के सुपुर्द कर दिया है, लेकिन यह कार्रवाई क्या पर्याप्त है? और बाकी बच्चों का क्या, जो अभी भी मजदूरी करने को मजबूर हैं? अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या सख्त कदम उठाता है, और क्या बाल मजदूरी पर लगाम लग पाती है या नहीं। Post navigation झारखण्ड के महामहिम राज्यपाल संतोष गंगवार ने बरा मे लौह पुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल की नवनिर्मित प्रतिमा का लोकार्पण किया। रणसूरा पंचायत के मुकरपुर गांव में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त, ग्रामीणों में भारी आक्रोश