रितिक अग्रवाल की रिपोर्ट _महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में किया गौरा-महेश का पूजन_ डोईवाला कुमाऊंनी संस्कृति के प्रसिद्ध लोकपर्व *सातू-आठूं* की क्षेत्र में धूम है। ग्राम पंचायत सिमलास ग्रांट में यह पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। पर्व का शुभारंभ विरुड़ पंचमी से हुआ, जिसके बाद ग्रामीणों ने विधि-विधान से गौरा-महेश की पूजा-अर्चना की। सिमलास ग्रांट के साथ ही नागल ज्वालापुर, नागल बुलंदावाला और दूधली ग्राम पंचायतों में भी महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पर्व मना रही हैं। पर्व के दौरान महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में गीत गाकर पूजा करती हैं, वहीं पुरुष कुमाऊंनी वेशभूषा धारण कर लोकगीत और लोकनृत्य में शामिल होकर खुशियां मना रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। मान्यता है कि गौरा माता यानी पार्वती भगवान महेश से नाराज होकर अपने मायके आती हैं। इसके बाद भगवान महेश उन्हें मनाने के लिए मायके पहुंचते हैं। इसी उपलक्ष्य में यह पर्व मनाया जाता है। *ग्राम प्रधान सुषमा बोरा* ने कहा कि _”सातू-आठूं हमारी संस्कृति और आस्था से जुड़ा पर्व है। इसे मनाने से हमारी पुरानी परंपराएं जीवित रहती हैं। इस पर्व में महिलाओं की भागीदारी प्रमुख रहती है।”_ https://khabre24x7.in/wp-content/uploads/2026/08/YouCut_20260820_090849856.mp4 किसानों के लिए भी इस पर्व का विशेष महत्व है। ग्रामीणों का मानना है कि इस दौरान की गई पूजा से अच्छी फसल और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। पर्व के दौरान पूरे क्षेत्र में लोकगीत और लोकनृत्य का दौर चल रहा है। कुछ दिनों तक गौरा-महेश की पूजा के बाद महिलाओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर उन्हें विदा किया। इस अवसर पर हेमां देवी, विमला देवी, पिंकी देवी, माधवी देवी, गोविंदी देवी, किरण बोरा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। Post navigation SIR को लेकर ग्रामीणों के बीच पहुंचे क्षेत्र पंचायत सदस्य मुस्तफा अंसारी भाग संख्या 110 अब हुआ 119 ग्रामीणों से जरूरी दस्तावेज दुरुस्त कराने की अपील ईद-ए-मिलाद-उल-नबी ( बारह वफ़ात )के दृष्टिगत जनपद में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मजिस्ट्रेटों की तैनाती