सांप प्रकरण,भ्रष्टाचार के आरोप सहित कई मामलों में संयुक्त एसएसई का मामला 11 साल से हरिद्वार में जमे रहने पर उठे सवाल, पुलिस महकमे में ‘सेटिंग-गेटिंग’ की चर्चाएं तेज! निलंबन के बाद भी नहीं बदला जिला,वरिष्ठ दरोगाओं में बढ़ रहा असंतोष! रुड़की। चर्चित “सांप प्रकरण” में गंभीर आरोपों का सामना करने और निलंबित होने के बावजूद एक एसएसआई का पिछले करीब 11 वर्षों से हरिद्वार जिले में ही तैनात रहना पुलिस महकमे में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। विभाग के अंदरखाने इस बात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि इतने लंबे समय से उनका दूसरे जिले में तबादला नहीं हो सका। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2015 से हरिद्वार जिले में लगातार तैनात इस एसएसआई को लेकर कई अधिकारी और कर्मचारी हैरानी जता रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि उनके साथ नियुक्त कई दरोगा वर्षों पहले पर्वतीय जिलों सहित अन्य जनपदों में स्थानांतरित हो चुके हैं, लेकिन संबंधित एसएसआई आज भी हरिद्वार जिले में ही बने हुए हैं। वरिष्ठता पर भारी पड़ रही पहुंच? महकमे में यह चर्चा भी जोरों पर है कि वरिष्ठता और स्थानांतरण नीति से अधिक प्रभाव “सेटिंग-गेटिंग” का देखने को मिल रहा है। सूत्रों का दावा है कि कई वरिष्ठ दरोगा लंबे समय से तबादले और महत्वपूर्ण तैनाती का इंतजार कर रहे हैं, जबकि संबंधित एसएसआई लगातार जिले में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। इससे विभाग के भीतर असंतोष भी बढ़ने की बातें सामने आ रही हैं। पुलिस महकमे में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब गंभीर आरोप लगने के बाद निलंबन जैसी कार्रवाई हो चुकी है, तब भी यदि किसी अधिकारी का वर्षों तक एक ही जिले में बने रहना संभव हो रहा है, तो इसके पीछे क्या वजह है। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि यदि स्थानांतरण नीति का समान रूप से पालन किया जाए तो लंबे समय से एक ही जिले में जमे इस एसएसआई को भी अन्य जनपदों में भेजा जाना चाहिए। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर पुलिस महकमे के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और अब इस एसएसआई के तबादले को लेकर विभाग में भी अंदरखाने तेजी से मांग उठने लगी है। Post navigation अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद एवं राष्ट्रीय बजरंग दल के स्थापना दिवस के पावन अवसर पर 24 जून 2026, दिन बुधवार को हरिद्वार में एक भव्य, ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गंगा किनारे करोड़ों के फ्लैटों की सोसाइटी पर उठे सवाल मंजूरी प्रक्रिया जांच के घेरे में