ललतारो पुल पर बिजली चोरी का खेल अवैध दुकानों में धड़ल्ले से जल रही बिजली विभाग पर उठे सवाल

 

हरिद्वार क्षेत्र के ललतारो पुल और उसके आसपास का क्षेत्र इन दिनों अवैध दुकानों और कथित बिजली चोरी को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सूत्रों की माने तो सरकारी नालों और सार्वजनिक भूमि पर बनी कई अवैध दुकानों में बिना नियमों के बिजली का उपयोग किया जा रहा है। जबकि संबंधित विभाग आंखें मूंदे बैठा है। बताया जा रहा है। कि ललतारो पुल के आसपास वर्षों से कई अस्थायी और स्थायी दुकानें संचालित हो रही हैं। इनमें से कई दुकानों के निर्माण को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। लेकिन अब बिजली कनेक्शनों और कथित बिजली चोरी को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जिन स्थानों पर दुकानों का निर्माण ही नियमों के विपरीत बताया जा रहा है। वहां आखिर बिजली कनेक्शन किस आधार पर जारी किए गए। सूत्रों के अनुसार बिना विभागीय मिलीभगत के यह संभव नहीं हो सकता। खुले तारों और अव्यवस्थित बिजली व्यवस्था के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कुछ समय पहले मनसा देवी क्षेत्र में हुई दुखद घटना के बाद भी बिजली विभाग ने कोई सबक नहीं लिया है। और संभावित खतरों को नजरअंदाज किया जा रहा है। कई दुकानों में बिजली के मीटरों की स्थिति भी संदिग्ध है। जबकि कुछ स्थानों पर सीधे लाइन से बिजली लेने की चर्चाएं भी आम हैं। हालांकि इस गंभीर समस्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

उच्च लोगों का कहना है। कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।

प्रशासन नगर निगम और बिजली विभाग की संयुक्त टीम बनाकर पूरे क्षेत्र का सर्वे कराया जाए और अवैध निर्माणों के साथ साथ बिजली कनेक्शनों की भी जांच की जाए। क्षेत्र में चर्चा है। कि विभागीय कार्रवाई के अभाव में अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। यदि नियमों के तहत जांच हो जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है। कि सरकारी नालों और विवादित भूमि पर बनी दुकानों तक बिजली कैसे पहुंची और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। इस पूरे मामले में प्रशासन और बिजली विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं। और जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है। हरिद्वार की जनता को भी इस मामले में प्रशासन के जवाब का इंतजार है।

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