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टाइगर शिकार और अंग तस्करी प्रकरण में श्यामपुर रेंज अधिकारी पर गंभीर आरोप निष्पक्ष जांच की मांग तेज

 

 

हरिद्वार। राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सामने आए टाइगर शिकार एवं अंग तस्करी प्रकरण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पशु संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत संस्था पियूपल्स फॉर एनीमल्स (पीएफए) हरिद्वार ने श्यामपुर रेंज अधिकारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। संस्था का आरोप है। कि संबंधित अधिकारी की लापरवाही के कारण वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई जिससे शिकारी तत्वों को सक्रिय होने का अवसर मिला।

संस्था पदाधिकारियों का कहना है। कि मामले की गंभीरता को देखते हुए रेंज अधिकारी को देहरादून मुख्यालय से संबद्ध (अटैच) किया गया है। हालांकि संस्था का स्पष्ट कहना है। कि केवल संबद्ध करना पर्याप्त नहीं है। बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। पीएफए हरिद्वार के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी रात्रि के समय अपने कार्यक्षेत्र में मौजूद रहने के बजाय निजी निवास पर समय बिताते रहे। संस्था का दावा है। कि अधिकारी रात्रि लगभग 9 बजे से अगले दिन दोपहर तक रेंज मुख्यालय से अनुपस्थित रहते थे जिससे वन्यजीवों की निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ गई।

संस्था के अनुसार अब पूरे मामले में संबंधित अधिकारी की सीडीआर और लोकेशन रिकॉर्ड की जांच अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उनका कहना है। कि कॉल डिटेल और लोकेशन रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान अधिकारी वास्तव में कहां मौजूद थे और उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन किस प्रकार किया। पीएफए ने आरोप लगाया कि यदि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपने क्षेत्र में सक्रिय रहते तो संभवत वन्यजीव अपराधों पर समय रहते अंकुश लगाया जा सकता था। संस्था का मानना है। कि टाइगर जैसे दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा में किसी भी स्तर की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि राजाजी क्षेत्र देश की महत्वपूर्ण जैव विविधता का केंद्र है। और यहां बाघों सहित अनेक दुर्लभ वन्यजीव निवास करते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में चूक पूरे वन्यजीव संरक्षण तंत्र पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। पीएफए ने मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कराई जाए ताकि वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जा सके। संस्था ने यह भी कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। संस्था के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

उधर इस प्रकरण को लेकर वन विभाग के भीतर भी चर्चाओं का दौर जारी है। क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमी और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोग भी मामले की पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें जांच प्रक्रिया सीडीआर और लोकेशन रिपोर्ट पर टिकी हैं। जिनसे यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि जांच में लापरवाही साबित होती है। तो यह मामला वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था के लिए बड़ा सबक साबित हो सकता है। फिलहाल टाइगर शिकार और अंग तस्करी से जुड़े इस बहुचर्चित मामले ने हरिद्वार के वन महकमे में हलचल मचा दी है। और लोग निष्पक्ष जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।

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