आज हरिद्वार जनपद में कार्यरत औद्योगिक संगठनों ने श्री मदन कौशिक, विधायक, हरिद्वार को उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने पर उनका हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन कर शुभकामनाएं प्रेषित की। इस अवसर पर उपस्थित सभी उद्योगपतियों ने माननीय मंत्री जी का आत्मीय स्वागत किया तथा विभिन्न औद्योगिक विषयों एवं समस्याओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। माननीय मंत्री जी ने सभी विषयों को गंभीरता से सुना और उनके शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने सभी से एकजुट होकर उत्तराखण्ड के औद्योगिक विकास को नई गति देने एवं प्रदेश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में औद्योगिक संगठन पदाधिकारीयो के रूप में विनीत धीमान, महासचिव लघु उद्योग भारती सिडकुल एवं हरिद्वार इंडस्टरीज डेवलपमेंट एसोसिएशन, सुनील पांडे, अध्यक्ष, बहादराबाद इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट वेलफेयर एसोसिएशन, अनुज चौहान, महासचिव, सिडकुल एंटरप्रेन्योर वेलफेयर एसोसिएशन, केतन भारद्वाज, जिलाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती रुड़की नगर, अजय कुमार गर्ग, सचिव, रुड़की स्मॉल स्केल इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, आत्मा सिंह, अरविंद गुप्ता, अवध गुप्ता, हरभजन सिंह, परमिंदर शर्मा, पुनीत गोयल, सुलभ जैन, सुरेश फुलवानी, मनोज मिश्रा सहित बड़ी संख्या में उद्यमी शामिल हुए। Post navigation गडोवाली गांव में गंदगी का अंबार, नमाजियों और राहगीरों की बढ़ी परेशानी *💫दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन से मंगलमय शुभकामनाएँ* *✨नवरात्रि के अवसर पर कन्याओं को “जिमाएँ” और “जमाएँ”* *स्वामी चिदानन्द सरस्वती* ऋषिकेश, 26 मार्च। दुर्गा अष्टमी के पावन, दिव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत इस दिव्य अवसर पर, माँ गंगा के पावन तट पर स्थित परमार्थ निकेतन से मंगलमय शुभकामनाएँ। यह पावन दिन शक्ति, श्रद्धा, साधना और आत्मजागरण का दिव्य संगम है, जो हमें अपने भीतर स्थित देवी स्वरूप शक्ति को पहचानने और उसे जागृत करने का अवसर प्रदान करता है। माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि जीवन में आने वाले प्रत्येक संघर्ष और प्रत्येक बाधा को हम अपनी आंतरिक शक्ति, विश्वास और संकल्प से परास्त कर सकते हैं। अष्टमी का यह दिन विशेष रूप से माँ महागौरी की आराधना का दिन है, जो पवित्रता, शांति, करुणा और निर्मलता का प्रतीक हैं। उनका आशीर्वाद हमें जीवन के सभी विकारों से मुक्त कर आत्मिक शुद्धता और दिव्यता की ओर अग्रसर करता है। नवरात्रि, बाहरी पूजा या अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्व हमें अपने भीतर झाँकने, अपने विचारों को पवित्र करने और अपने आचरण को धर्ममय बनाने की प्रेरणा देता है। दुर्गा अष्टमी हमें यह संदेश देती है कि वास्तविक भक्ति वही है, जो हमारे व्यवहार में झलके, हमारे शब्दों में मधुरता लाए और हमारे कर्मों में सेवा, प्रेम और करुणा का संचार करे। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि हम सभी एक ही चेतना के अंश हैं। माँ दुर्गा की उपासना भी इसी एकत्व और समभाव का प्रतीक है, जहाँ न कोई भेदभाव है, न कोई विभाजन, केवल प्रेम, करुणा और शक्ति का विस्तार है। आज के इस पावन दिन पर, जब हम कन्या पूजन के माध्यम से नारी शक्ति का सम्मान करते हैं, तब यह आवश्यक है कि हम केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन नारी के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण का संकल्प लें। जब हम समाज में प्रत्येक नारी को उसी श्रद्धा और सम्मान की दृष्टि से देखें, जैसे हम देवी की पूजा करते हैं। यही सच्चा सनातन है, यही सच्ची साधना है। दुर्गा अष्टमी हमें संदेश देती है कि हमारे भीतर जो नकारात्मकता, भय, क्रोध, अहंकार और अज्ञान है, वही हमारे जीवन के वास्तविक राक्षस हैं। माँ दुर्गा की कृपा से हम इन आंतरिक शत्रुओं का नाश कर सकते हैं और अपने जीवन को सत्य, प्रेम, शांति और प्रकाश से भर सकते हैं। जब हम अपने भीतर की शक्ति को पहचानते हैं, तब हम न केवल स्वयं का उत्थान करते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान में भी योगदान देते हैं। इस पावन अवसर पर, आइए हम सभी यह संकल्प लें कि हम अपने जीवन को केवल व्यक्तिगत सुखों तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि समाज, राष्ट्र और सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के लिए समर्पित करेंगे। सेवा, साधना और संस्कार को अपने जीवन का आधार बनाएंगे। माँ दुर्गा से प्रार्थना है कि वे सभी के जीवन में शक्ति, साहस, समृद्धि और शांति का संचार करें। आपके जीवन से सभी बाधाएँ दूर हों, मार्ग में आने वाले सभी अंधकार दूर हों और जीवन सदैव धर्म, सत्य और प्रेम के प्रकाश से आलोकित रहे। परमार्थ निकेतन में आज दुर्गा अष्टमी के अवसर पर विशेष हवन कर विश्व शान्ति की प्रार्थना की।